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नवरात्रि व्रत कथा | सप्तम दिन कालरात्रि पूजा | Navratri Vrat Katha 7th day Mata Kalratri
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। उनका रूप उग्र और भयंकर है - वे गधे पर सवार होती हैं, उनके बाल बिखरे रहते हैं और वे बिजली के समान चमकती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
सप्तमी के दिन कालरात्रि पूजा से जीवन के सभी भय, अंधकार और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इससे जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार जब राक्षसों ने देवताओं पर आक्रमण किया, तब देवी ने अपना उग्र रूप कालरात्रि धारण कर समस्त राक्षसों का संहार किया। यह रूप बुराई और अधर्म के नाश का प्रतीक माना जाता है।
भजन के बोल
कथा:
जब राक्षसों ने देवताओं पर आक्रमण किया, तब देवी ने अपने उग्र रूप कालरात्रि को धारण कर सभी राक्षसों का संहार किया।
उनका यह रूप बुराई का नाश करने और अधर्म को मिटाने का प्रतीक है।
पूजा का महत्व:
कालरात्रि देवी की पूजा से जीवन के सभी प्रकार के भय और अंधकार का नाश होता है।
यह पूजा नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
ध्यान मंत्र:
"एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥"
"ॐ देवी कालरात्र्यै नमः"
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