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करवा चौथ व्रत कथा Karwa-chauth | संपूर्ण कथा, पूजा विधि और महत्व हिंदी में
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 16 मई 2026
भजन का अर्थ
करवा चौथ व्रत कथा वीरवती नामक साहूकार-पुत्री की कथा है, जिसने बिना वास्तविक चंद्रोदय देखे जल्दबाज़ी में व्रत तोड़ा और पति को खो दिया, फिर एक वर्ष कठोर तप कर माँ पार्वती की कृपा से अपने पति को पुनः जीवित पाया।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह व्रत कथा कार्तिक मास की चतुर्थी को विवाहित स्त्रियों द्वारा चंद्रोदय पर व्रत खोलने से पहले सुनी जाती है, ताकि पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिले।
इससे जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार वीरवती के भाइयों ने बहन को भूखा-प्यासा देख पेड़ पर छलनी की आड़ में दीपक जलाकर झूठा चाँद दिखा दिया था। असली चाँद निकलने से पहले व्रत तोड़ने के कारण उसके पति की मृत्यु हो गई, जिसे उसने पूरे वर्ष तप कर और अगले करवा चौथ पर विधिवत व्रत रखकर पुनः जीवित पाया।
भजन के बोल
🌸 संपूर्ण करवा चौथ व्रत कथा 🌸
प्राचीन समय में एक नगर में एक धनवान साहूकार रहता था। उसके सात पुत्र और एक अत्यंत सुंदर एवं प्रिय पुत्री थी, जिसका नाम वीरवती था। वीरवती अपने सातों भाइयों की लाड़ली बहन थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तब उसका विवाह एक सुयोग्य और धर्मात्मा युवक के साथ कर दिया गया।
विवाह के बाद वीरवती अपने मायके आई हुई थी। उसी समय करवा चौथ का पावन पर्व आया। वीरवती ने भी अन्य सुहागिन स्त्रियों की तरह अपने पति की लंबी आयु के लिए कठोर निर्जला व्रत रखा। उसने सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण की और पूरे श्रद्धा भाव से व्रत का संकल्प लिया।
पूरा दिन बिना अन्न और जल के रहने के कारण शाम होते-होते वीरवती अत्यंत कमजोर हो गई। उसका चेहरा पीला पड़ गया और वह बार-बार चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करने लगी। अपनी बहन की ऐसी स्थिति देखकर उसके भाइयों का हृदय द्रवित हो उठा। वे अपनी प्रिय बहन को इस प्रकार कष्ट में नहीं देख पा रहे थे।
तब भाइयों ने एक उपाय सोचा। वे नगर से दूर एक पीपल के वृक्ष के पास गए और वहाँ पेड़ पर एक दीपक जलाकर छलनी की आड़ में रख दिया। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आकाश में चंद्रमा निकल आया हो।
इसके बाद भाइयों ने घर आकर वीरवती से कहा—
“बहन, चाँद निकल आया है। अब तुम पूजा करके अपना व्रत खोल लो।”
अपने भाइयों की बात पर विश्वास करके वीरवती ने चंद्रमा को अर्घ्य दिया और व्रत खोलने के लिए भोजन करने बैठ गई। लेकिन जैसे ही उसने पहला निवाला मुँह में रखा, उसे छींक आ गई। दूसरे निवाले में बाल निकल आया और तीसरा निवाला लेने से पहले ही उसे अपने पति की मृत्यु का दुखद समाचार प्राप्त हुआ।
यह समाचार सुनते ही वीरवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह विलाप करने लगी। तभी उसकी भाभियों ने उसे बताया कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उसने बिना वास्तविक चंद्र दर्शन किए व्रत तोड़ दिया था। व्रत का नियम भंग होने के कारण उसे यह दुख सहना पड़ा।
वीरवती को अपनी भूल का बहुत पश्चाताप हुआ। उसने निश्चय किया कि वह पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से पुनः करवा चौथ का व्रत करेगी। उसने अपने पति के शव के पास रहकर कठोर तपस्या आरंभ कर दी और पूरे वर्ष भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की भक्ति करती रही।
एक वर्ष बाद पुनः करवा चौथ का दिन आया। वीरवती ने पूर्ण नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखा। उसकी कठोर तपस्या, सच्ची निष्ठा और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसे दर्शन दिए। वीरवती ने माता से अपने पति को पुनः जीवित करने की प्रार्थना की।
माता पार्वती उसकी भक्ति और समर्पण से अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने वीरवती के पति को पुनः जीवित होने का वरदान दिया। देखते ही देखते उसका पति जीवित हो उठा। वीरवती का घर पुनः सुख और आनंद से भर गया।
तभी से करवा चौथ का व्रत श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान के साथ मनाया जाने लगा। माना जाता है कि जो स्त्री इस व्रत को सच्चे मन और नियमपूर्वक करती है, उसे अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🌷 निष्कर्ष
करवा चौथ का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। वीरवती की कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, धैर्य और निष्ठा से हर कठिनाई को दूर किया जा सकता है। यही कारण है कि आज भी महिलाएँ पूरे श्रद्धा भाव से करवा चौथ का व्रत रखती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
🌼 करवा चौथ पूजा विधि (संक्षेप में)
प्रात:काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
निर्जला व्रत का संकल्प लें।
शाम को करवा माता, भगवान शिव-पार्वती और श्री गणेश की पूजा करें।
करवा चौथ व्रत कथा सुनें।
चंद्रमा निकलने पर छलनी से चाँद और पति का दर्शन करें।
चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलें।
🌺 करवा चौथ व्रत का महत्व
यह व्रत पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है।
करवा चौथ वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और समर्पण को मजबूत करता है।
भारतीय संस्कृति में इसे अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
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