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नवरात्रि व्रत कथा | षष्ठम दिन कात्यायनी पूजा | Navratri Vrat Katha 6th day Mata Katyayani
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। सिंह पर सवार यह देवी चार भुजाओं वाली हैं और साहस, शौर्य व आत्मविश्वास प्रदान करने वाली मानी जाती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह कथा छठे दिन विशेषकर उन भक्तों द्वारा सुनी जाती है जो जीवन में साहस और शक्ति की कामना करते हैं।
इससे जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार जब महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब ऋषि कात्यायन ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया। इसी तप के फलस्वरूप देवी उनके घर कात्यायनी रूप में अवतरित हुईं और महिषासुर का वध किया।
भजन के बोल
कथा:
कात्यायनी देवी का जन्म उस समय हुआ जब महिषासुर ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था।
ऋषि कात्यायन ने माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया, जिसके फलस्वरूप देवी उनके घर अवतरित हुईं और महिषासुर का वध किया।
पूजा का महत्व:
कात्यायनी देवी की पूजा से साहस, शौर्य और आत्म-विश्वास की प्राप्ति होती है।
यह पूजा उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो जीवन में साहस और शक्ति की कामना करते हैं।
ध्यान मंत्र:
चंद्रहासोज्जवलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥"
"ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"
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