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नवरात्रि व्रत कथा | पंचम दिन स्कंदमाता पूजा | Navratri Vrat Katha 5th day Mata Skandamata
धार्मिक कथाएँ
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 5 अक्टूबर 2024
भजन का अर्थ
नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। चार भुजाओं वाली यह देवी अपने पुत्र को गोद में लिए सिंह पर सवार रहती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
स्कंदमाता की पूजा से मातृत्व का आशीर्वाद और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है, इसीलिए इस दिन संतान-सुख की कामना करने वाले भक्त विशेष श्रद्धा से पूजा करते हैं।
इससे जुड़ी मान्यता
कथा के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच घोर युद्ध हुआ, तब स्कंदमाता ने अपने पुत्र स्कंद को देवसेना के अग्रणी योद्धा के रूप में युद्ध में भेजा और स्वयं माता के रूप में अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती रहीं।
भजन के बोल
कथा:
स्कंदमाता की कथा उनके पुत्र भगवान स्कंद से जुड़ी है, जो देवताओं के सेनापति थे।
जब देवताओं और असुरों के बीच घोर युद्ध हुआ, तब स्कंदमाता ने अपने पुत्र को युद्ध में अग्रणी योद्धा के रूप में भेजा।
पूजा का महत्व:
स्कंदमाता की पूजा करने से मातृत्व का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और साथ ही पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
वे माता के रूप में अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं।
ध्यान मंत्र:
"सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥"
"ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः"
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