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संकट मोचन हनुमान अष्टक || Hanuman Ashtakam Lyrics in Hindi

हनुमान भजन

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संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम

जोड़ा गया: 15 अक्टूबर 2025

भजन का अर्थ

संकटमोचन हनुमान अष्टक में हनुमान जी के आठ महान पराक्रमों का वर्णन है - बाल्यकाल में सूर्य को निगलना, सीता की खोज, संजीवनी लाना, अहिरावण वध आदि।

हर छंद के अंत में यह दोहराया गया है कि संसार में हनुमान जी को कौन नहीं जानता, यह उनकी सर्वव्यापी ख्याति को दर्शाता है।

यह भजन कब और क्यों गाया जाता है

यह स्तोत्र संकट और भय के समय, विशेषकर मंगलवार-शनिवार की पूजा और संकटमोचन मंदिरों में पाठ किया जाता है।

इससे जुड़ी मान्यता

यह स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित माना जाता है और इसमें हनुमान जी के बाल्यकाल में सूर्य निगलने से लेकर अहिरावण वध तक के आठ प्रमुख प्रसंगों का उल्लेख है, जो हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और राम-भक्ति को दर्शाते हैं।

भजन के बोल

बाल समय रवि भक्षी लियो तब , तीनहुं लोक भयो अंधियारों
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो ---- (2)

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो
आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो
जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (2)

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो --- (4)

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