"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"
जय गणेश जय गणेश देवा आरती | Jai Ganesh Deva Aarti Lyrics in Hindi
गणेश भजन
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
भजन का अर्थ
यह गणेश जी की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जो एकदंत, चार भुजाधारी, माथे पर सिंदूर और मूषक की सवारी करने वाले गणपति की स्तुति करती है।
इसमें बताया गया है कि गणेश जी अंधों को आँख, कोढ़ियों को काया, निःसंतान को पुत्र और निर्धन को धन देने वाले करुणामय देवता हैं, जिनके दर्शन मात्र से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह आरती किसी भी शुभ कार्य या पूजा के आरंभ में अनिवार्य रूप से गाई जाती है, क्योंकि परंपरा में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है - बिना उनकी आरती के कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।
भजन के बोल
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा |
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ||
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी |
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी ||
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा |
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ||
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
बोलो गजानन महाराज की जय 🙏.
दिल दबाकर अपना समर्थन दिखाइए



