"गीत की धुन को समझने के लिए, वीडियो जरूर देखें।"

हरी धरै मुकुट खेले होरी Hari Dhare Mukut Khele Holi (Kumaoni Holi Lyrics)
🎵 Video coming soon

हरी धरै मुकुट खेले होरी Hari Dhare Mukut Khele Holi (Kumaoni Holi Lyrics)

Kumaoni Holi

📲 WhatsApp

भजन का अर्थ

यह कुमाऊंनी होली गीत मुकुट धारण करके होली खेलते भगवान कृष्ण का वर्णन करता है। मथुरा से कन्हैया और गोकुल से राधा गोरी आती हैं — सात साल का कन्हैया और बारह साल की राधा। रेशम की डोरी वाले झूले पर दोनों झूलते हैं, खम्भ टूटता है और राधा लपटझपट होती है। यह गीत राधा-कृष्ण के बालपन की मीठी होली का सुंदर चित्रण है।

भजन के बोल

हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी,

हरी धरै मुकुट खेले होरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी ||

कहाँ से आये कुँवर कन्हैया, कहाँ से आये कुँवर कन्हैया.....

कहाँ से राधा गोरी , हरी धरै मुकुट खेले होरी

मथुरा से आयो कुँवर कन्हैया, मथुरा से आयो कुँवर कन्हैया......

गोकुल से राधा गोरी , हरी धरै मुकुट खेले होरी ||

कितने बरस को कुँवर कन्हैया, कितने बरस को कुँवर कन्हैया......

कितने बरस की राधा गोरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी ||

सात बरस को कुँवर कन्हैया, सात बरस को कुँवर कन्हैया..........

बारह बरस राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

काहे के दो खम्भ बने है, काहे के दो खम्भ बने है...........

काहे की लागी डोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

काहे के दो खम्भ बने है, काहे के दो खम्भ बने है.............

रेशम की लागी डोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

एक पर झूले कुँवर कन्हैया, एक पर झूले कुँवर कन्हैया........

दूजे पर राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

टूट गयो खम्भ लटक गई डोरी, टूट गयो खम्भ लटक गई डोरी.........

लपट झपट राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी,

हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||

More Kumaoni Holi Bhajans

See all →