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हरी धरै मुकुट खेले होरी Hari Dhare Mukut Khele Holi (Kumaoni Holi Lyrics)
कुमाऊँनी होली
संकलित एवं सत्यापित: Gunjan Upadhyay — भजन लेख टीम
जोड़ा गया: 7 फ़रवरी 2025
भजन का अर्थ
यह कुमाऊंनी होली गीत मुकुट धारण किए बाल कृष्ण और राधा की होली का वर्णन करता है - सात वर्ष के कन्हैया और बारह वर्ष की राधा रेशमी डोरी वाले झूले पर झूलते हैं, और डोरी टूटने पर राधा लपटझपट हो जाती हैं।
यह भजन कब और क्यों गाया जाता है
यह गीत उत्तराखंड की बैठकी होली की परंपरा में, विशेषकर होली के अवसर पर संगीत महफिलों में गाया जाता है।
भजन के बोल
हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी,
हरी धरै मुकुट खेले होरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी ||
कहाँ से आये कुँवर कन्हैया, कहाँ से आये कुँवर कन्हैया.....
कहाँ से राधा गोरी , हरी धरै मुकुट खेले होरी
मथुरा से आयो कुँवर कन्हैया, मथुरा से आयो कुँवर कन्हैया......
गोकुल से राधा गोरी , हरी धरै मुकुट खेले होरी ||
कितने बरस को कुँवर कन्हैया, कितने बरस को कुँवर कन्हैया......
कितने बरस की राधा गोरी, हरी धरै मुकुट खेले होरी ||
सात बरस को कुँवर कन्हैया, सात बरस को कुँवर कन्हैया..........
बारह बरस राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
काहे के दो खम्भ बने है, काहे के दो खम्भ बने है...........
काहे की लागी डोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
काहे के दो खम्भ बने है, काहे के दो खम्भ बने है.............
रेशम की लागी डोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
एक पर झूले कुँवर कन्हैया, एक पर झूले कुँवर कन्हैया........
दूजे पर राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
टूट गयो खम्भ लटक गई डोरी, टूट गयो खम्भ लटक गई डोरी.........
लपट झपट राधा गोरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी,
हरि धरै मुकुट खेले होरी, हरि धरै मुकुट खेले होरी ||
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